Ganesh ji Arti (gajanan ganapti)
आरती गिरजा नंदन की गजानन असुर निकंदन की |
मुकुट मस्तक पर है प्यारा , हाथ में अंकुश है न्यारा ...
गले में मोतियन की माला , उमासुत देवो में आला ...
प्रथम सब तुमको नमन करे , सदा सुर नर मुनि ध्यान धरे ...
करे गुणगान मिटे अज्ञान , होय कल्याण ....
मिले भक्ति भव् भंजन की , गजानन असुर निकंदन की ...
आरती गिरिजा नंदन की, गजानन और निकंदन की।
२.
बालहट प्रभु ने जब कीन्हा , माता की आज्ञा सर लीन्हा ...
पूर्ण तुम प्राण अपना कीन्हा ,अंत में मस्तक दे दीन्हा ...
सुनत भइ क्रोधित जगमाता , कहा क्या कीन्हा शिवदाता ..
कहा हे नाथ पुत्र का माथ , देव मम हाथ ...
वरन होइ निंदा देवन की....... गजानन असुर निकंदन की
आरती गिरजा नंदन की गजानन असुर निकंदन की ...
३.
चकित भये सुनकर कैलाशी करू जीवित में अविनाशी
गणो से बोले यो वाणी शीघ्र लाओ तुम कोई प्राणी
तुरंत वन जाये , शीश गज पाए , तुरंत जुड़वाये
ख़ुशी भई माँ को सूतधन की, गजानन असुर निकंदन की
आरती गिरिजा नंदन की गजानन असुर निकंदन की
४.
हुए गणराजा बलधारी , बुद्धि पे विद्या अवतारी
सकल कारज में हो वृद्धि डुलावे चवर रिद्धि सिद्धि
आप है मंगल के स्वामी , जानते सब अंतर्यामी
५.
आश पुराण कीजे मेरी , लगायी तुमने क्यों देरी
दरश तुम जी आप गणेश , मिटाना दुःख दरिद्र कलेश
जगत में रखना मेरी लाज , विनय भगतो की है गणराज
में हु नादान , मिले सत्ज्ञान ,देध्
करू नित सेवा चरणण की, गजानन असुर निकंदन की
आरती गिरिजा नंदन की , गजानन असुर निकंदन की
आरती गिरिजा नंदन की , गजानन असुर निकंदन की
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